मध्य प्रदेश सरकार ने गणेश चतुर्थी पर पूर्ण प्रदेश में दिया सर्वसामान्य अवकाश
भोपाल, 26 अगस्त 2025 – मध्य प्रदेश शासन ने अपने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर आंशिक अवकाश की पूर्व घोषणा को संशोधित करते हुए पूरे प्रदेश में 27 अगस्त 2025 को सामान्य अवकाश घोषित कर दिया है। यह निर्णय प्रदेश के सभी विभागों तथा विभिन्न सरकारी कार्यालयों के लिए लागू होगा।

27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर रहेगा संपूर्ण प्रदेश में अवकाश
भोपाल, 26 अगस्त 2025 – मध्य प्रदेश शासन ने अपने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा गणेश चतुर्थी के अवसर पर आंशिक अवकाश की पूर्व घोषणा को संशोधित करते हुए पूरे प्रदेश में 27 अगस्त 2025 को सामान्य अवकाश घोषित कर दिया है। यह निर्णय प्रदेश के सभी विभागों तथा विभिन्न सरकारी कार्यालयों के लिए लागू होगा।
शासन का आदेश और व्यापक प्रबंधन
मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम से जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब 27 अगस्त को पूर्व घोषित ऐच्छिक अवकाश की बजाय संपूर्ण प्रदेश में अवकाश रहेगा। इस निर्देश की अधिसूचना बुधवार को सभी संबंधित विभागों, मुख्यालयों, जिला कार्यालयों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को भिजवा दी गई है।
संबंधित अधिकारियों को आदेश भेजे गए
इस आदेश की प्रति मुख्यमंत्री सचिवालय, राजस्व मंडल, व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड, लोकायुक्त, मानव अधिकार आयोग, उच्च न्यायालय, निर्वाचन आयोग तथा समस्त प्रशासनिक विभागों को प्रेषित कर व्यापक प्रचार-प्रसार एवं अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यह प्रबंध श्रद्धा, उत्सव और सामूहिक भागीदारी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि गणेश चतुर्थी के पर्व की गरिमा और महत्व के अनुरूप प्रदेशवासियों को लाभ मिले।
गणेश उत्सव का महत्व
गणेश उत्सव हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, समृद्धि और बुद्धि के देवता माना जाता है। यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। मराठा राजा शिवाजी ने इसे राज्य स्तर पर महत्व दिया और लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता संग्राम के समय इसे आम जनता के लिए बड़े पैमाने पर मनाने का माध्यम बनाया। गणेश उत्सव के दौरान लोग अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर गणेश की मूर्तियों की स्थापना करते हैं और दस दिनों तक पूजा-अर्चना करते हैं। यह त्योहार सद्भावना, भाईचारे और नवोदय का संदेश देता है।
उत्सव के विषय में जानकारी
गणेशोत्सव दस दिनों तक चलता है और हिंदू पंचांग के भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक मनाया जाता है। इस दौरान गणेश जी की प्रतिमा को सजाया जाता है और प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती, भजन एवं प्रसाद वितरण किए जाते हैं। अंतिम दिन, जिसे अनंत चतुर्दशी कहा जाता है, गणेश मूर्तियों का जल में विसर्जन किया जाता है जो जीवन के निरंतर परिवर्तन और नया आरंभ का प्रतीक है। यह उत्सव न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि सामाजिक और सामुदायिक मेलजोल का भी उत्सव है।
भगवान गणेश का जन्मदिवस होने के कारण यह पर्व नए कार्यों की शुरुआत में शुभ माना जाता है। गणेश जी को “लंबोदर” के नाम से भी जाना जाता है और उनकी पूजा पहले की जाती है ताकि सभी कार्य सफल हों और विघ्न बाधा दूर हो।
पूजा विधि की झलक
उत्सव के दौरान श्रद्धालु गणेश प्रतिमा की स्थापना करते समय वेद मंत्रों का उच्चारण करते हैं, प्राणप्रतिष्ठा अनुष्ठान करते हैं और कई प्रकार के भोग अर्पित करते हैं, जिनमें मोदक प्रमुख है। पूजा के दौरान दीप, धूप, फूल, फल और विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। गणेशोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी होती हैं, जिससे उत्सव और भी भव्य बनता है।













