मध्य प्रदेश

रीवा पुलिस उपमहानिरीक्षक का निर्देश: वर्दी में सोशल मीडिया पर रील बनाने पर सख्त रोक

📍 रीवा, 6 जुलाई 2025 | संवाददाता विशेषरीवा क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने एक सख्त आदेश जारी करते हुए सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वर्दी में सोशल मीडिया पर "रील" बनाने और वायरल करने से तत्काल रोकने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मउगंज और मैहर जिले के पुलिस अधीक्षकों को संबोधित करते हुए जारी किया गया है।

📍 रीवा, 6 जुलाई 2025 | संवाददाता विशेष

रीवा क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश सिंह चंदेल ने एक सख्त आदेश जारी करते हुए सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वर्दी में सोशल मीडिया पर “रील” बनाने और वायरल करने से तत्काल रोकने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मउगंज और मैहर जिले के पुलिस अधीक्षकों को संबोधित करते हुए जारी किया गया है।

📌 आदेश की मुख्य बातें:

  • पुलिस कर्मियों द्वारा वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा।
  • यह देखा गया है कि कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में फ़िल्मी डायलॉग्स या गानों पर आधारित वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं, जिससे पुलिस की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
  • वर्दी में रील बनाना एक गंभीर विषय है और इससे आम जनता में पुलिस के प्रति गंभीरता और अनुशासन की भावना कमज़ोर होती है।

📢 D.I.G. रीवा का निर्देश:

“ऐसा कोई भी कृत्य जो पुलिस की गरिमा को ठेस पहुंचाए, वह न केवल अनुशासन के विरुद्ध है, बल्कि सेवा की मर्यादा के विपरीत भी है। ऐसी किसी भी पोस्ट की जानकारी मिलने पर संबंधित कर्मचारी को स्वयं उत्तरदायी माना जाएगा और उसके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

📑 पालन की प्रक्रिया:

  • थाना प्रभारियों को यह आदेश है कि वे 3 दिनों के भीतर सभी पुलिसकर्मियों से लिखित में रील न बनाने का शपथ पत्र लें।
  • भविष्य में भी ऐसे मामलों की निगरानी की जाएगी, और आदेश की अवहेलना करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
  • यह पत्र क्रमांक 760/2025 के तहत जारी किया गया है और इसकी प्रति पुलिस महानिरीक्षक, रीवा ज़ोन को भी भेजी गई है।

🔎 निष्कर्ष:

रीवा पुलिस प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय पुलिस सेवा की मर्यादा और अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।वर्दी पहनना केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है—जिसका प्रदर्शन सोशल मीडिया पर नहीं, सेवा और कर्तव्य के माध्यम से होना चाहिए।

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