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आरबीआई की बड़ी घोषणा: रेपो रेट में 0.50% की कटौती, CRR भी घटा — आर्थिक विकास को मिलेगा बल

नई दिल्ली, ब्यूरो रिपोर्ट

नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को देश की मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव करते हुए रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट (0.50%)की कटौती की है। अब यह दर घटकर 5.50% पर आ गई है, जो बीते कई वर्षों में सबसे कम स्तरों में से एक है। इसके साथ ही कैश रिज़र्व रेश्यो (CRR) को भी 100 बेसिस पॉइंट तक घटाया गया है, जिससे बैंकों के पास कर्ज वितरण के लिए अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी।यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अप्रैल 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति 3.16% दर्ज की गई, जो कि पिछले छह वर्षों का न्यूनतम स्तर है। इस स्थिर मुद्रास्फीति दर ने केंद्रीय बैंक को मौद्रिक नीति में ढील देने की अनुमति दी है ताकि आर्थिक गति को प्रोत्साहित किया जा सके।

आरबीआई गवर्नर के शब्दों में आरबीआई गवर्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया,

“देश के आर्थिक संकेतकों में सुधार हो रहा है। मांग में पुनरुद्धार को देखते हुए हमें विश्वास है कि ब्याज दरों में यह कटौती छोटे उद्योगों, उपभोक्ताओं और कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देगी।”

क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बैंकिंग, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और MSME सेक्टर को सबसे अधिक फायदा पहुंचेगा। बैंकों की फंडिंग लागत कम होने से लोन सस्ते हो सकते हैं, जिससे कर्ज लेने वालों को राहत मिलेगी और बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा।

बाजार की प्रतिक्रिया

आरबीआई की घोषणा के बाद शेयर बाजारों में भी सकारात्मक हलचल देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बढ़त दर्ज की गई, विशेष रूप से बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में।

विश्लेषण

इस दर कटौती को भारत सरकार की विकासोन्मुखी आर्थिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और मंदी की आहट बनी हुई है, तब RBI का यह कदम घरेलू मांग को सहारा देने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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