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तूल पकड़ता पार्किंग विवाद: दो दिनों से हर तरफ पार्किंग की चर्चा, विधायक और प्रशासन आमने-सामने

सिंगरौली। शहर के ट्रॉमा सेंटर परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। बीते दो दिनों से शहर में इसी मुद्दे पर चर्चाएं गर्म हैं। विवाद की चिंगारी उस वक्त भड़की जब सिंगरौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक राम निवास साह ने पार्किंग वसूली कर रहे कर्मियों को FIR की धमकी देते हुए पार्किंग बंद करने का आदेश दे डाला। उस वक्त मौके पर कलेक्टर, एसपी, CMHO, सिविल सर्जन समेत प्रशासनिक अमला भी मौजूद था।

सिंगरौली। शहर के ट्रॉमा सेंटर परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। बीते दो दिनों से शहर में इसी मुद्दे पर चर्चाएं गर्म हैं। विवाद की चिंगारी उस वक्त भड़की जब सिंगरौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक राम निवास साह ने पार्किंग वसूली कर रहे कर्मियों को FIR की धमकी देते हुए पार्किंग बंद करने का आदेश दे डाला। उस वक्त मौके पर कलेक्टर, एसपी, CMHO, सिविल सर्जन समेत प्रशासनिक अमला भी मौजूद था।

ट्रॉमा सेंटर में टेंडर प्रक्रिया के तहत हो रही पार्किंग वसूली

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर परिसर में पार्किंग व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने हेतु रोगी कल्याण समिति द्वारा विधिवत टेंडर निकाला गया था। इस प्रक्रिया में कई लोगों ने भाग लिया और अंततः मनीष पांडे को सबसे कम दर पर टेंडर प्रदान किया गया। नियमानुसार, उन्हें रोगी कल्याण समिति द्वारा वर्क ऑर्डर भी जारी किया गया। इस व्यवस्था के अंतर्गत पार्किंग शुल्क लिया जाना पूरी तरह से वैध है।

क्या है रोगी कल्याण समिति और इसके कार्य?

रोगी कल्याण समिति (RKS) एक पंजीकृत सोसायटी होती है, जिसका उद्देश्य अस्पतालों में रोगियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। यह समिति अस्पताल में पर्ची शुल्क, पार्किंग, कैंटीन आदि से धन संग्रह कर गरीब व जरूरतमंद मरीजों को शव वाहन, निःशुल्क एम्बुलेंस, आर्थिक सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

विधायक की नाराजगी का कारण क्या था?

पार्किंग वसूली कर्मियों के अनुसार, पार्किंग शुल्क वसूलते समय एक दिव्यांग कर्मचारी ने अनजाने में विधायक राम निवास साह को नहीं पहचाना। इससे विधायक नाराज हो गए और पार्किंग पर्ची, बारकोड जब्त कर लिए। इसके बाद FIR की धमकी देते हुए पार्किंग बंद करने का आदेश दे दिया गया। जानकारों का मानना है कि किसी व्यक्ति द्वारा फोन पर शिकायत किए जाने के बाद ही विधायक मौके पर पहुंचे थे।

पार्किंग की व्यवस्था के फायदे

पार्किंग शुल्क के चलते अस्पताल परिसर में वाहनों की लाइनबद्ध व्यवस्था बनी रहती है, जिससे एम्बुलेंस व गंभीर मरीजों का सुगम आवागमन सुनिश्चित हो पाता है। ₹10 शुल्क में वाहन सुरक्षित रहता है और इससे अर्जित धन रोगी कल्याण समिति के माध्यम से जनकल्याण में भी लगता है।

सवाल उठता है — क्या सही दिशा में था विधायक का आक्रोश?

विधायक के तेवर प्रशासन पर भारी पड़े, परंतु जनता का एक बड़ा तबका इस बात से सहमत है कि ऐसे तेवर उन्हें उन सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ दिखाने चाहिए, जो प्राइवेट अस्पतालों की दलाली करते हैं। सरकारी अस्पताल की ड्यूटी के दौरान ही कुछ डॉक्टर बाहर की क्लीनिकों में मरीज भेजते हैं, जिससे दूर-दराज से आए गरीबों को उचित इलाज नहीं मिल पाता।

यदि ऐसे भ्रष्ट और दलाल प्रवृत्ति के तत्वों पर विधायक साह सख्ती दिखाएं, तो निश्चित ही यह जनता के हित में बेहतर उदाहरण होगा।

विश्लेषण

यह मुद्दा केवल पार्किंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या राजनीति जनसेवा से भटक रही है? क्या अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर जनता की सेवा में ईमानदारी से लगे हैं?-

संवाददाता, सिंगरौली

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One Comment

  1. सरकारी अस्पताल में जाने वाले लोगों के पास कितना पर्याप्त पैसा नहीं होता कि पार्किंग शुल्क भी अदा कर सके वह किसी की गाड़ी बुकिंग करके जाते हैं ऊपर से पार्किंग चार्ज लिया जाता है मैं हॉस्पिटल गया था मुझे भी अनावश्यक लगा बाकी फंड की बात रही तो सरकार से फंड लिया जा सकता है

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