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जयंत चौकी के सामने से धड़ल्ले से गुजर रहे अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर, चौकी प्रभारी मौन!

हर दिन सुबह से लेकर रात तक दर्जनों ट्रैक्टर अवैध रेत से लदे हुए, जयंत चौकी के सामने से बेरोकटोक निकलते हैं। ना कोई पूछताछ, ना रोक-टोक, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि पूरे खेल में प्रशासनिक संरक्षण या मौन सहमति शामिल है।

जयंत (सिंगरौली), विशेष संवाददाता

जयंत क्षेत्र में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता को धता बताते हुए अवैध रेत खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सारा अवैध धंधा जयंत पुलिस चौकी के सामने से ही हो रहा है, और चौकी प्रभारी पूरी तरह मौन बने हुए हैं।

दर्जनों ट्रैक्टर, खुलेआम रेत की ढुलाई

हर दिन सुबह से लेकर रात तक दर्जनों ट्रैक्टर अवैध रेत से लदे हुए, जयंत चौकी के सामने से बेरोकटोक निकलते हैं। ना कोई पूछताछ, ना रोक-टोक, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि पूरे खेल में प्रशासनिक संरक्षण या मौन सहमति शामिल है।

“एंट्री” के दम पर चलता कारोबार

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह पूरा अवैध खनन “एंट्री” सिस्टम पर आधारित है — यानि तयशुदा राशि देकर ट्रैक्टर मालिक और खनन माफिया पुलिस चौकी को सूचना में रखे बिना कारोबार चला रहे हैं। यह राशि प्रतिदिन, प्रतिवाहन व प्रतिचक्कर के हिसाब से तय होती है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

ऐसा नहीं है कि यह गतिविधि छिपी हो — पूरे क्षेत्र में लोग जानते हैं कि रेत का यह अवैध व्यापार पुलिस चौकी की निगरानी में ही फल-फूल रहा है।फिर भी जयंत चौकी प्रभारी की चुप्पीऔर कार्रवाई का न होना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है:

  • क्या अवैध खनन माफिया को चौकी से संरक्षण प्राप्त है?
  • क्या स्थानीय प्रशासन भी इस मूक सहमति का हिस्सा है?
  • आखिर, कानून के इतने निकट हो रहे इस अपराध को क्यों नजरअंदाज़ किया जा रहा है?

क्षेत्रीय असंतोष और संभावित पर्यावरणीय खतरे

अवैध रेत खनन से स्थानीय जल स्रोतों, नदियों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों और सड़क मार्गों पर ट्रैक्टरों की अत्यधिक आवाजाही से भी जीवन प्रभावित हो रहा है। साथ ही, इस गतिविधि से क्षेत्र में अपराध का ग्राफ भी बढ़ रहा है।

न्याय की मांग

जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

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